#शब्दों_की_यात्रा : : #हरिजन_गांधी से #दलित_अंबेडकर तक की यात्रा : क्यों जरूरी थी ?
---------------------------------------- बहुत पहले मुझे ये तो नहीं याद है कि कौन सा वर्ष और कौन सा महीना , लेकिन हिन्दी अखबारों की हेडलाइन देखी थी – “ कि अगर हम भगवान की औलाद हैं तो गांधी क्या शैतान की औलाद था ?’ एक कर्कशा नारी का कर्कशा सम्बोधन गांधी के लिए / उस समय मूझे भी लगा कि बात तो सही है , क्योंकि तब मैं भी गांधी को भारत का और खास तौर पर हिंदुओं का दुश्मन ही मानता था / वो महिला बाद मे बहुत प्रसिद्ध हुयी और उसने डॉ अंबेडकर के विचारों से प्रभावित लोगों के मत (वोट ) का खुलेआम सौदा किया / और न जाने कितने बड़े धन की मालिकाइन है आज , ये वो खुद भी नहीं जानती / गांधी पहले व्यक्ति थे जिन्होने समुद्री डाकुवो(अंग्रेजों ) द्वारा भारत के आर्थिक तंत्र को विनष्ट करने के कारण, मैनुफेक्चुरिंग के उस्ताद लोगों को बेरोजगार और बेघर किए गए लोगों को एक सम्मानित संज्ञा दी - #हरिजन, अर्थात प्रभु परमेश्वर के समान , अर्थात दरिद्रनरायन / लेकिन गांधी भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने छुवाछूट का विरोध किया और आजीवन हरिजन बस्ती में रहे।छुवाछुट को हिंदुत्व का कलंक घोसित किया। अपने समय में कट्टर हिन्दू होने का टाइटल मिला उनको ब्रिटिश द्वारा भी और जिन्ना द्वारा भी। तो सवाल ये पैदा होता है कि किन लोगों को जरूरत थी कि उन हरिजनों को हिन्दू गांधी के चंगुल से निकाल कर रानी विकटोरिया द्वारा प्रदत्त दलित ( depressed Class ) संज्ञा से सुशोभित करवाने की शाजिश रचने की ? इससे क्या हासिल होना था ? और किसको हासिल होना था ? उन हरिजनों को कि उनको हिन्दू गांधी के चंगुल से मुक्त करवाने वालो को ? इसको समझने के लिए आपको उनको समझना पड़ेगा जो Event Manager हैं जिन्होने उसकी व्याख्या की – और उसे हरिजन से हरिजना बनाया गया ;यानि हरि या भगवान की औलाद ; यानि जिसके बाप का पता नहीं, यानि हरामी : तो फिर इसके मायने बदल गये , और गांधी महा मानव से शैतान की औलाद की यात्रा तय करते हैं ,और फिर गांधी ही गाली हो गए हरिजनों के लिए / और ये जुमले कामयाब हुये / कौन थी ये अंजान महिला, जिसको गांधी को गाली देने के कारण फ्रंट पेज पे जगह मिली ?? और कौन ताकतवर लोग थे जिन्होने वो जगह दिलवाई ?? उनके इरादे क्या थे ?? अगर गांधी के हरिजन का अर्थ भगवान की औलाद है : तो सदजन का अर्थ अवश्य ही सज्जन पुरुष की औलाद होगी , और दुर्जन का अर्थ अवश्य ही दुस्ट बाप की औलाद होता होगा / कौन थे वो #क्रॉस_ब्रेड_पोषित_हरामी जिन्होंने ये व्याख्या की और उसको हर मस्तिस्क में प्लांट किया ?? वैसे मेरे हिसाब से डॉ अंबेडकर गांधी के विरोधी अवश्य थे वैचारिक स्तर पर , लेकिन उन्होने कभी #गांधी_के_हरिजन को #अंबेडकर_के_दलित से विस्थापित करने कि बात कभी की ही नहीं / दलित चिंतकों से आग्रह है कि यदि मैं गलत हूँ तो उसको सुधारें / नोट -- तुलसीदास जी कहते हैं – “ हरिजन जानि प्रीति अति काढ़ी सजल नयन पुलकावलि बाढी /” ये बात सीताजी के भावनाओं को संदर्भित करने के लिए लिखा : जब हनुमान जी अशोकवाटिका मे सीता से मिलने जाते हैं , जहां हरिजन का अर्थ भगवान का प्रतिनिधि, भगवान का आत्मीय जन या उनही के समान / नोट - जिस तर्क और तर्ज से हरिजन को नकार कर दलित का बाना पहना कि उनको हिन्दू और सनातनी गांधी से detag किया जा सके , लेकिन राजनैतिक रोटी सेकने के लिए पुनः #बहुजन का बाना धारण कर लिया । तो कोई बताये कि यदि हरिजन अपाच्य था तो उन्ही तर्कों पर बहुजन सुपाच्य कैसे ? भगवान की संतति होना नामंजूर । और बहुत से लोगों की संतति होना मंजूर ? बहूत से लोग ? तो कितने लोग ? कोई लिमिट निर्धारित है कि नहीं ? |
Sunday, 5 June 2016
मायावती और दलित : एक ईसाई शजिश की पैदाइश
क्या आप पुनर्जागरण के लिए तैयार है ?
सूत कातना सिखाएं - ग्रामवासियों को विशेष तौर पर महिलाओं , बालिकाओं और बालकों को ।
#रुई और #कपास की जानकारी रखने वाले मित्र बताएं कि कैसे मिलेगी ।
साथ में वे मित्र भी बताएं कि इस सूत बनाने को सिखाया कैसे जाय ?
फिर अगला कदम है लूम में इस सूत से कपड़ा बनाने का ।
जिन मित्रों के पास ये ज्ञान हो , या इससे भिज्ञ हों तो बताएं ।
हम उनको बुलाकर लूम बनाएंगे ।
और दरजी तो हर जगह उपलब्ध है । वो इस सूत से बनाये गए लूम से बने वस्त्र बनाएगा ।
हम भी पहनेंगे ।
आप भी पहनें ।
कम से कम घर में ।
यहीं से पुनर्जागरण शुरू होगा।
आप तैयार हैं ?
हमरी न मानों रंगरेजवा से पूँछो : कहाँ मर बिला गयी रंगरेज जाति
How The Fluid Indian "Jaat Pratha" was changed into Alien / European Rigid Caste System : Part- 3
"मॉडर्न caste सिस्टम एक सनकी रेसिस्ट ब्रिटिश ऑफीसर H H RIESLEY की दें है जिसने 1901 में नाक की चौड़ाई के आधार पर "unfailing law of Caste" का एक सनकी व्यवस्था के तहत एक लिस्ट बनाई , जिसमे उसने नाक की चौड़ाई जितनी ज्यादा हो उसकी सामाजिक हैसियत उतनी नीचे होती हैं , इस फॉर्मूले के तहत सोशियल hierarchy के आधार पर जो लिस्ट बनाई वो आज भी जारी है और संविधान सम्मत है / यही भारत की ब्रेकिंग इंडिया फोर्सस का , और ईसाइयत मे धर्म परिवर्तन का आधार बना हुवा है /
ऐसा नहीं है कि भारत मे जात प्रथा थी ही नहीं / ये थी लेकिन उसका अर्थ था एक कुल या वंश , जिसके साथ कुलगौरव और एक भौगोलिक आधार के साथ साथ एक पेशा भी जुड़ा हुवा था /"
अब MA शेरिंग की 1872 की पुस्तक -"caste आंड ट्राइब्स of इंडिया " से उद्धृत उस प्रथा की रूपरेखा समझने की कोशिश करें ।
"MA SHERING शृंखला -5 " जात और जाति (Caste) में क्या अंतर है ?
"Caste and Tribes of India "
चॅप्टर xiii पेज- 345
Caste of weavers , thread spinners ,Boatmen नुनिया / लूनिया beldars Bhatigars
कटेरा या धुनिया
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रुई की धुनाई करने वाली एक caste है जिनको धुनिया कहा जाता है / ढेर सारे मुसलमान और हिन्दू इस व्यवसाय से जुड़े हुये हैं / रुई की धुनाई और सफाई के लिये जिस यंत्र का ये प्रयोग करते हैं , वो एक साधारण धनुष के समान होता है / जमीन पर उकडूं बैठकर ताज़े रूई के ढेर पर , जिसमें धूल और तिनके और अन्य गंदगी भरी होती है, बायें हाथ में धनुष पकड़कर और दाहिने हाँथ में लकड़ी के mallet से कटेरा लोग जब धनुष की रस्सी पर प्रहार करते हैं तो रूई के ढेर के उपरी सतह पर हलचल होने लगती है / और रूई के ढेर से ह्लके रेशे इस रस्सी से चिपक जाते हैं / ये प्रक्रिया लगातार जारी रहती है जिससे रूई की रूई की बढिया और सुन्दर धुनाई हो जाती है और सारी गंदगी अपने भार की वजह से रूई से अलग होकर जमीन में गिर जाती है / ये caste बनारस दोआब और अवध के पूर्वी जिलों मे पायी जाती है /
कोली या कोरी
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ये बुनकरों (weavers ) की caste है / इनकी पत्नियाँ भी इनके साथ साथ काम करती हैं और इनकी मदद करती हैं / ये समुदाय छोटा है और आगरा तथा प्रांत के पश्चिमी जिले मे पाया जाता है /
"कोली वैस राजपूत के सम्मानित वंशज है /"
नोट - शेरिंग ने 1872 मे #caste शब्द का प्रयोग किन अर्थों मे किया है , जिसमे एक #व्यवसाय में #हिन्दू और #मुसलमान सब सम्मिलित हैं /
और मॉडर्न caste सिस्टम जो Risley की 1901 की जनगणना की देन है , आज किन अर्थों में प्रयुक्त होता है , आप स्वयं देखें / कोली कैसे जो कभी एक संम्मानित क्षत्रिय व्यवसायी थे , जब सारे व्यवसाय नष्ट हो गये तो , शेडुलेड़ caste और OBC में लिस्टेड हो जाते है , आप स्वयम् देखें / आभाषी दुनिया के मित्र श्रीराज कोली ने स्वयं यह बात स्वीकार किया है ,की उनके वंशज कहते हैं कि वे क्षत्रिय थे / आपको ये समाज का विखंडन और बंटवारा समझ मे आ रहा है न ?
"MA SHERING शृंखला -6
"Caste and Tribes of India "
चॅप्टर xiii पेज- 346
तांती
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बुनकरों की एक कॅस्ट , जो , सिल्क का किनारा (बॉर्डर) aur भांती भांती प्रकार के धातु बनाते हैं / ये किंकबाब या सोने चांडी से मढ़े हुये महन्गी ड्रेस , जिसमें इन्हीं महन्गी धातुओं की embroidary हुई होती हैं , बनाते हैं / बताया जाता है कि ये गुजरात से आये हुये हैं / बनारस में इस ट्राइब का मात्र एक परिवार है जो धनी हैं और शहर के एक विशाल भवन में निवास करता है /
तंत्रा (Tantra)
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तंत्रा एक अलग clan (वंश) है जो सिल्क के धागों का निर्माण करता है / बताया जाता है कि ये दक्षिण से आये है , और इनको निचली कॅस्ट मे माना जाता है क्योंकि ब्राम्हण इनके घरों मे खाना नही खाते हैं /
कोतोह (Kotoh)
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अवध के जिलों मे पे जाने वाली थ्रेड स्पिन्नर्स की की एक छोटी परंतु सम्मानित caste है /
Page- 346
रँगरेज
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कपड़े डाइ करने वालों की caste है ये / ये शब्द रंग से उद्धृत है , और रेज यानी ये काम करने वाला / ये caste प्रांत के लगभग सभी जिलों मे पायी जाती हैं /
छिप्पी
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कपड़ों पर प्रिंटिंग करने वालों की caste / इनका विशेष कार्य कपडो पर क्षींट stamp karna है / ये लोगों का ये लोग ज्यादा न्हैं हैं , लेकिन ये प्रांत के लगभग सभी जिलों मे पाये जाते हैं / बनारस में ये एक अलग caste के अंतर्गत आते हैं /
"छिप्पी अपने आपको राठौर राजपूत कहते हैं "
मल्लाह
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सभी नाविकों को मल्लाह कहा जाता है चाहे वो जिस भी caste के हों / इसके बावजूद मल्लाहों की एक विशेष ट्राइब जो कई कुलों (क्लॅन्स) में बंटे हुये हैं / वो निम्नलिखित हैं :-
१- मल्लाह
२- मुरिया या मुरीयारी
३- पनडुबी
४- बतवा या बातरिया
५- चैनी चैन या चाय
६- सुराया
७- गुरिया
८- तियर
९- कुलवाट
१०- केवट
ये नाविक भी हैं , fisherman (मछली मारने वाले ) भी हैं , और मछली पकडने के लिये जाल की manufacturing भी करते हैं / पहले ये एक दूसरे में शादी करते थे लेकिन अब वो बंद हो चुका है / हिन्दुओं की कई और castes भी मल्लाही का पेशा करते हैं /
नोट : कोई बताए कि ऊपर वर्णित समुदायों मे कौन अगडी थी कौन पिछड़ी थी ? ये किस ग्रंथ मे लिखा है - कि फलाना जात अगड़ी और फलाना जात पिछड़ी ?
और अगर नहीं लिखा तो ये आया कहाँ से ?
अंबेडकर के चेलों से ये प्रश्न है /
कहाँ गए छिप्पी तांती तंत्रा कोताह रंगरेज ?
मर गए , बिला गए या जहन्नुम रशीद हो गए ।
क्यों और कैसे ?
जब इनका व्यवसाय ही उच्छिन्न हो गया तो ये कहाँ से बचते ?
जय हो बाबा के संविधान का ।
Saturday, 21 May 2016
बच्चों को स्कूलो में धार्मिक शिक्षा क्यों नही दी जा सकती है ?
यद्यपि यूरोप मे सेकुलरिस्म का आविसकार मजबूरी मे हुआ था क्योंकि यूरोप मे रोमन साम्राज्य और संस्कृति के इसाइयत द्वारा विनाश किए जाने के बाद शासन के अधिकार की खींचतान चर्च और राजा के बीच लंबे समय तक चलता रहा / उसका उदाहरण है 1600 मे चर्च द्वारा ब्रुनो नामक वैज्ञानिक की आग मे डालकर हत्या करने का जघन्य दुष्कर्म का करना / क्योंकि उसने heliocentric Theory का प्रतिपादन किया था जिसके अनुसार पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है , जोकि होली बाइबल की अवधारणा के विपरीत है / कालांतर मे गैलीलियो को भी इसी थियरी को आगे बढ़ाने के कारण उम्रक़ैद की सजा सुनाई गई /
इसलिए लोकतान्त्रिक परंपरों की शुरुवात होने पर यूरोप मे चर्च को राज काज मे दखल देने से रोकने का जो नया सिस्टम गठित किया गया उसे सेकुलरिस्म का नाम दिया गया, जिसकी उत्पत्ति भी ग्रीक शब्द से है /
भारत मे भी सेकुलरिस्म है , इस बात से सहमत होना पड़ेगा क्योंकि संविधान मे लिख दिया गया है / यूरोप और अम्रीका का सेकुलरिस्म भारत से किस तरह भिन्न है उस पर चर्चा नहीं करूंगा /
चर्चा जिज्ञासा और सुझाव का एक अलग मुद्दा है आज /
अम्रीका और यूरोप मे सेकुलरिस्म है लेकिन वहाँ भी विभिन्न धर्मों को स्कूल और विश्वविद्यालय मे पढ़ाये जाने का प्रावधान है /Inter Religious Institutes हैं // और अगर उनके देशों मे ये हो रहा है तो उसको अपने देश मे क्यों न लागू किया जाय ? आखिर आज हम उनही को तो अपना आदर्श मानते है / और नहीं भी मानते तो सेकुलर राज मे भी अपने धर्म मजहब और रेलीजन का ज्ञान तो होना ही चाहिये , क्योंकि वही तो मूलाधार है चरित्र का /
इस्लाम और ईसाई मत के मानने वाले भी इस बात से सहमत होंगे कि धर्म रेलीजन या मजहब का उद्देश्य मनुष्यों मे अच्छे चरित्र का निर्माण , उनके चरित्र मे मानव मात्र के लिए दया भाव , और विश्व कल्याण की भावना को प्रवाहित करना है /
तो क्यों न एक काम किया जाय कि सभी धर्म मजहब और रेलीजन के धर्माचार्यों के मत अनुसार बाइबल कुरान और हिन्दू धर्म शास्त्रों के नीति वाक्य बच्चों के प्रथम कक्षा से ही उनके पाठ्य क्रम का हिस्सा बनाया जाय ? कक्षा 1 से 5 तक हर धर्म के 10 - 10 नीति वाक्य , 6 से 10 तक 20 नीति वाक्य , और 11 से ग्रेजुएशन तक 30 - 30 नीति वाक्य पढ़ाएँ जाय /
जिस चीज का विरोध होने की समभावना है , उसका समाधान भी दे रहा हू / ये तर्क किया जा सकता है कि मुस्लिम बच्चे हिन्दू शास्त्र क्यूँ पढे और क्यों उसका इम्तहान दे , या फिर बाकियों के भी इसी तरह की आपत्तियाँ हो सकती हैं / तो उसके लिए ये सुझाव है कि किसी भी धर्म मजहब और रेलीजन के छात्र के लिए दूसरे धर्मों के नीति वाक्य न ही पढ़ने की बाध्यता हो और न ही उसमे इम्तिहान देकर पास होने की / सिर्फ अपने धर्म के नीतिवाक्य पढे और उसी का इम्तिहान दें /
अब एक समस्या आएगी वामपंथियों की जो नास्तिक हैं / यद्यपि उनकी संख्या बहुत कम है फिर भी उनको नीति वाक्य पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता क्योंकि चरित्र उनके लिए प्रायः गौड़ है / तो उनको चारवाक दर्शन या कताई बुनाई जैसे विकल्प दिये जा सकते हैं /
PMO India Rajnath Singh Smriti Zubin Irani
Sunday, 15 May 2016
भारत आज भी गुलाम: पोप की सत्ता कायम है
Saturday, 14 May 2016
फेसबुक में सक्रिय SC और ओबीसी और तथाकथित बौद्ध आखिर ब्राम्हणों के इतने विरोधी क्यों है ?
किस ग्रन्थ में ( आंबेडकर साहित्य को छोड़कर ) ब्राम्हणो ने इन पर अत्याचार की बात लिखी है ?
लिखी भी हो तो किया कब ?
कोई डोक्युमेंट्री प्रमाण हैं क्या ?
पिछले 1000 साल से भारत अत्याचारी और बर्बर इस्लामियों और इअस्सियों का शासन रहा है ।
तो तथाकथित मनुस्मृति , जिसको इन्होंने पढ़ा भी नही होगा कभी , कब इस देश के राजाओ का संविधान रहा है ?
अगर डॉ बेडकर पुरुषोक्त को क्षेपक घोसित कर सकते हैं तो क्या मनुस्मृति से उद्धृत किये जाने वाले 2- 4 श्लोक क्यों क्षेपक नही हो सकते ?
क्योंकि आज तक किसी शूद्र के कान में पिघला शीशा डालने का कोई प्रमाण, साहित्य में भी नहीं मिला पिछले 5000 साल में ।
दूसरी बात क्या इनके पूर्वज नपुंसक थे , जिन्होंने उस अत्याचार का विरोध नहीं किया कभी ?
जबकि इस देश में अनैतिक और अत्याचारी राजा को पदच्युत करने के लिए ब्राम्हणों ने संघर्ष किया है ।
नन्द राज्य को ख़त्म कर, एक अनजाने कुल के बच्चे को राजा बनाया कौटिल्य ने ।
चन्द्रगुप्त को राजा बनाया ।
और खुद दरिद्र ब्रम्हाण की तरह एक शिक्षक का जीवन बिताया ।
Vedic traditions have continuing till date in India more or less, whether we are aware of it or not .
Why and How ?
India followed Primogeniture nature in Ruling system since very early . The best example is Ramchandra ji . Primogeniture means - The right of succession belonging to first born child .
That's why we see none or so less blood shed when next generation took over ruling power in history of Hindu India .
It was brocken by barbarian Moghals and turk Invaders , when Successors had siblings . Best visible in Aurangjeb taking over throne by imprisoning his Father and killing brutally coverdly and conspirately his Elder brother Dara Shikoh, and other two brothers .
But Indian muslims whether in Pakistan or in India follow that Primogeniture culture at social cultural and family level .
Because most of them are converted Muslims, so they might be persuing other activities as per Islamic laws but they couldn't abondon this culture .
From which source this culture comes from ?
It comes from vedic tradition and Itihas books like Mahabharat and Ramayan .
I will like to give only few examples.
पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता ही परम तपः ।
पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वाः प्रीणन्ति देवताः ।।
स्कन्द पुराण माहेश्वर - कुमारिकाखंड 4.89-90
Father is heaven , father is Dharma and father is greatest Tapa . If father becomes happy , all Dieties become happy .
माता गरीयसी यच्च तेनैताम् मन्यते जनः।
ज्येष्ठो भ्राता पितृसमो मृते पितरि भारत ।।
महाभारत - अनुशासन पर्व 105.16
Bharatnandan ( son of bharat )! The pride of mother is greatest , so people respect her especially. But after death of father, elder brother should be considered as father .
These books were taught in India's gurukuls till 1830 , before Maukaley's education was laid down on Indians .
So oral tradition have been able to carry forward it for 200 years .
But I don't know how long it will continue in the era of blinded persuation of West .