Tuesday, 11 August 2015

आखिर इन अकालों का अर्थ क्या है ? J Sunderland : India in Bondage ; 1929

आखिर इन अकालों का अर्थ क्या है / यहाँ एक सम्मानित ब्रिटिश नागरिक , जोकि भारत मे वर्षों तक सेवारत रह चुके हैं , और ज्ंको भारत की गहरी समझ है , उनकी पुस्तक से एक चित्रण पेश कर रहा हूँ / चूंकि वो ब्रिटिश है इसलिए अगर उनको कोई पूर्वाग्रह होगा तो अपने देशवासियों के पक्ष मे ही होगा / मिस्टर WS Lilly ने अपनी पुस्तक “ इंडिया अँड इट्स प्रॉब्लेम्स “ मे निम्नांकित रूप से लिखते है :
“ 19वीं शताब्दी के पहले 80 वर्षों मे अकाल से भारत मे एक करोड़ अस्सी लाख मौतें हुयी / मात्र उसी एक वर्ष मे , जिस वर्ष मे रानी विक्टोरिया सत्तासीन होती हैं , दक्षिण भारत मे 50 लाख लोग भुंख से मर जाते हैं / बेल्लारी जिला , जिससे मैं व्यक्तिगत रूप से परिचित हूँ – जिसका क्षेत्रफल वेल्स की यूलना मे दो गुना होगा , 1876 – 1877 मे वहाँ की पूरी आबादी का एक चौथाई हिससा अकाल के कारण मौत के मुह मे समा जाता है / मैं अपना खुद का अकाल का वो अनुभव नहीं भूल पाऊँगा जब घोड़े पर प्रतिदिन सुबह जेबी मै नरकंकालों की भीड़ के बीच से गुजरता था , तो सड़क के किनारे पड़ी लावारिश लाशे, जिनको दफनाया भी नहीं गया था , उनको नोच नोच कर कुत्ते और गिद्ध खा रहे थे / उससे भी दुखद दृश्य उन बच्चों का था , जिनको ग्रीक मे “ विश्व के आनंद का श्रोत “ के नाम से सम्वोधित किया गया है , जो अपनी माताओं से वंचित , जिनकी ज्वार से तपती कटोंरो मे धँसी चमकती आंखे , जो मात्र मांसमज्जा रहित अस्थिपंजर मात्र, जिनके सर के स्थान पर एक अस्थि खोपड़ी बची थी , जिंका पूरा व्यक्तित्व ही घृनित बीमारी का घर तब से है जब से वो अपनी माँ के गर्भा मे आयें होंगे , और जन्म से लेकर आज तक जिनकी परवरिश इनहि आकाओं के बीच हुयी होगी – वो दृश्य और वो घटना जब भी मुझे याद आती है आज भी मुझे विचलित कर देती है / भारत मे जो भी व्यक्ति उन अकालों के समय रहा है , और अंदर तक झाँका है , वो इन सबसे परिचित है /
मिस्टर लिली का अनुमान 80 सालों मे 18,000,000 मौतों का है / इसका अर्थ समझते है –- मात्र दो पीढ़ियों के समयकाल जरा से ज्यादा समय मे अन्न के अभाव मे इतने लोगों की मौत हुयी जिसकी तुलना , कनाडा न्यू इंग्लैंड स्टेट्स , डेलावेर और फ्लॉरिडा की पूरी आबादी , और फ़्रांस की आधी आबादी को मिलकर होगी / लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात ये है कि जैसे जैसे समय गुजरता गया , वैसे ही इन अकालों की संख्या और इनकी भयवहता बढ़ती गई /
ब्रिटिश सरकार लाखों लोगों की मौतों का कारण बुखार , पेंचिस या अन्य इन्हीं तरह की बीमारियाँ की रिपोर्ट तैयार करता है , जबकि ये अकाल मौतें लंबे समय के अन्नाभाव और endless starvation के कारण हो रही है / मान ले यदि पिछले शताब्दी को 25 साल के कालखण्ड में बांटे तो पहले 25 वर्ष में 5 अकाल आये सुर 10 लाख लोगों की मौत हुई । दुसरे 25 वर्षों में दो अकाल आये और 4 लाख लोगों की मौत हुई । तीसरे 25 वर्ष में 6 अकाल और 50 लाख मौतें । और शताब्दी के अंतिम 25 वर्षों में -- हम क्या पाते हैं ? 18 अकाल और हुई मौतों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से कुल 1.5 करोड़ से 2.6 करोड़ ।और इनमे वो लाखो मौते शामिल नहीं है which are kept alive ( over 6,000,000 ) by government doles .

जब भी प्लेग या इंफ्लुएंजा जैसे epidemic होते हैं , इन मौतों का कारण लंबे समय से अन्नाभाव मे बिताया गया भूंख से व्यतीत किया गया जीवन है /
J Sunderland page 11-13
यानि भारत की कुल आबादी का दसवां हिस्सा अन्नाभाव के कारण मौत के मुंह में समा जाता है जिसका कारन डॉ आंबेडकर ने ‪#‎मनुस्मृति‬ में खोज निकाला।

#‎झूट्ठे_इतिहासकारों_की_पोल_खोल‬


बहुत से लोग आपको तर्क देते मिल जाएंगे कि अंग्रेज भारत के हित में रेल ले आये । बड़े बड़े कंस्ट्रक्शन किये । आदि आदि ।
1929 में J Sunderland ने 33 साल की रिसर्च के बाद एक बुक लिखी इंडिया इन बाँडेज ।उसी से प्रस्तुत है ।
" अमेरिका से लंदन और फिर वहां से भारत जाने के लिए हम भव्य स्टीमर का प्रयोग करते हैं ।जिसमे बहुत ही रुचिकर सहयात्रियों से आपका पाला पड़ता है , जिनमे व्यापारी और अन्य यात्री होते हैं , जिसमे बहुधा भारतीय सेना के ऑफिसर होते है जो छुट्टी में परिवार के साथ समय बिताकर भारत लौट रहे होते हैं ।हम बम्बई में उतरते हैं जो आपको पेरिस लंदन न्यूयॉर्क या वाशिंगटन की याद दिलाता है ।हमारे होटल इंग्लिश स्टाइल के होते हैं ।हम 1500 मील दूर स्थित कलकत्ता पहुँचने के लिए संसार के भव्यतम निर्मित रेलवे स्टेशन पहुचते है , जो कभी भारत की राजधानी हुवा करता था । कलकत्ता पहुँचने पर , जो महलों के शहर के नाम से जाना जाता है , उसके नाम से चमत्कृत नहीं होते।
इन स्टीमेरों का मालिक कौन है , जिससे हम भारत पहुँचते हैं ? ब्रिटिश । बम्बई के भव्य रेलवे स्टेशन का निर्माण किसने किया ? ब्रिटिश । कलकत्ता पहुँचने के लिए रेल का निर्माण किसने किया ? ब्रिटिश ।कलकत्ता की आलीशान बिल्डिंग्स का मालिक कौन है ? ज्यादातर ब्रिटिश । हमे पता चलता है कि बम्बई और कलकत्ता बड़े व्यापार के केंद्र हैं ।ये आश्रयजनक रूप से वृहद् व्यापार किसके हाथों में है ? ब्रिटिश । हमे पता चलता है कि भारत की ब्रिटिश सर्कार ने 40 000 के आसपास की रेलवे लाइन बिछाई है ; देश भर में संपर्क हेतु पोस्टल और टेलीग्राफ सिस्टम बनाया है ; इंग्लिश पैटर्न पर आधारित कानूनी कोर्ट बनाये हैं ; और अन्य बहुत से काम किये हैं भारत को यूरोपीय सभ्यता की दिशा में आगे ले जाने हेतु ।इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं कि भारत भ्रमण पर आया व्यक्ति यह बोले कि -" ब्रिटिश ने भारत के लिए कितना काम किया है ।" " भारत के लिए ब्रिटिश शासन कितना ज्यादा लाभकारी है ।"
लेकिन क्या हमने सब कुछ देख लिया ? इसका दूसरा कोई पक्ष नहीं है क्या ? क्या हमने इस तथ्य की जांच कर ली कि इन भौतिक उपलब्धियों का आधार क्या है ? ये जो वैभव के लक्षण हमें दिख रहे हैं , क्या ये भारतीयो के बैभव के लक्षण है , या उनके शासक अंग्रेज मालिकान के वैभव के लक्षण है ?
अगर अंग्रेज यहाँ मौज मस्ती के साथ रह रहे हैं तो इस देश के लोग किस तरह से रह रहे हैं ? इन विलासी और भव्य महलों में जिन पर ब्रिटिश का कब्जा है और जिसके निर्माण की क्रेडिट वो खुद को दे रहे हैं , आखिर उसके निर्माण में लगे खर्च का भुगतान कौन कर रहा है ? इसी तरह रेलवे टेलीग्राफ और अन्य चीजों का भी ? क्या ब्रिटिश (भुगतान कर रहा है ) ? या उसका भुगतान इस देश से उगाहे गए टैक्स से हुवा है जो आज दुनिया का सबसे गरीब देश है ? क्या हम इस देश के गावँ और शहरों में रह रहे भारतीयों की दशा का अध्ययन कभी किया है ? इस देश का 80 प्रतिशत जनता रैयत है - यानि छोटा किसान जो जमीन की पैदावार पर गुजारा करता है ।क्या कभी हमने ये जानने का प्रयास किया है कि वो किस दशा में रह रहे हैं , उनकी हालत साल दर साल बेहतर हो रही है या बदतर हो रही है ?
विशेषकर क्या हमने उन अकालों के बारे में जान्ने का प्रयास किया है क्या , आधुनिक दुनिया की दिल दहलाने वाली घटना , जो भारत में मौत की बारिस कर रही है , जिसके परिणामस्वरूप प्लेग और संक्रामक रोगों का साया लोगों के सर पर मंडरा रहा है ? भारत को समझने के पूर्व भारत के इस पक्ष को भी परिचित होने की आवश्यकता है ।पिछले कुछ वर्षों के भारत के इतिहास का ये सबसे डिस्टर्बिंग तथ्य है जिसने क्रमिक अकालों के कारन प्लेग जैसी महामारियों को जन्म दिया है । ""
पेज 9 -11

India in Bondage : J Sunderland

भारत के समाज संस्कृति और वैभव के बारे मे जेम्स मिल मक्ष्मुल्लर MA Sherring या आरिजिनल संस्कृत टेक्स्ट के लेखक जॉन मुईर के निगाहों से ही देखा समझा गया है , जो एक धूर्त और झूठे खडयंत्र कारियों का गिरोह भर था ।

कालांतर मे ‪#‎वाम_कुपंथियों‬ ने ‪#‎मार्क्स_मंत्र‬ के देखरेख मे उसको आगे बढ़ाया जिसने 1853 मे लिखा कि -
" अंग्रेजों के जिम्मे 2 महत्वपूर्ण काम है - (1) Asiatic सोसाइटी ( भारतीय समाज ) का विनाश , और (2) उसके ऊपर पाश्चात्य भौतिकवाद को लादना । और वो आज भी यही कर रहे हैं।
आज भी अनेकों भारतीय अंग्रेजों के दरियादिली और उनके योगदान का गुण गाते रहते है कि अंग्रेजों ने अलान किया और फलां किया।

जब 1928 मे डॉ अंबेडकर साइमन कमीसन से मुहब्बत की पींगें बढ़ा रहे थे, तो 1929 मे J Sunderland नामक अमेरीकन ने 33 साल भारत के बारे मे रिसर्च करके एक बूक लिखी - India In Bondage। उसी से उद्धृत कुछ अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ :
" आखिर इंग्लैंड भारत मे है ही क्यूँ ? पहली बात तो ये है कि वो वहाँ गया ही क्यूँ , और अभी तक टिका हुआ क्यू है वहाँ ? अम्रीका की जब खोज हुई थी , तो यदि भारत अम्रीका कि तुलना मे प्रायः खाली स्थान वाला देश होता , और अंग्रेज़ वहाँ घर बना कर बसना चाहता था , तब भी बात समझ मे आती ।लेकिन वो तो पहले से ही (सघन आबादी से ) भरी हुयी थी , तो व्योहारिक स्तर पर ये तथ्य समझ मे आ जाता है कि अंग्रेज़ वह बसने नहीं गया था । अगर भारतीय बर्बर और असभ्य होते , जिसके कोई निशान नहीं मिलते , तो भी उनको विजित कर उनके ऊपर शासन करना उचित माना जा सकता था। लेकिन वो भारतीय ग्रेट ब्रिटेन कि तुलना मे प्राचीन काल से ही सुसंगठित शासन चलाने वाले लोग थे , जिनकी सभ्यता इंग्लैंड के पैदाइश के पूर्व ही अत्यंत विकसित हो चुकी थी।
महान दिल्ली दरबार मे 1901 मे भारत के वाइसरॉय लॉर्ड कर्जन ने कहा था कि -- " (भारत मे ) उस समय ताकतवर साम्राज्य हुआ करता था जब अंग्रेज़ जंगलों मे भटका करते थे , और ब्रिटिश कॉलोनियाँ जंगलों मे इधर उधर घूमा करती थीं। भारत ने मानवता के लिए इतिहास , दर्शन और धर्म के क्षेत्र मे , ब्रम्हाण्ड मे किसी भी सभ्यता की तुलना मे अमित योगदान दिया है "। ऐसी है वो धरती , जिसको इंग्लैंड ने जीता और Dependency की तरह शासन कर रहा है । ऐसे हैं वो लोग जिनको इंग्लैंड बंधक बनाए हुये है ; जिनको उनको भाग्य के सहारे छोड़ दिया गया है , और उनको आवाज भी उठाने नहीं दे रहा। किंग एडवर्ड के राज्याभिषेक के अवसर पर कनाडा के सम्मानित प्रधानमंत्री सर एडवर्ड लौरिएर ने घोषणा की कि -- " रोम का साम्राज्य गुलाम देशों से निर्मित था , जबकि ब्रिटिश साम्राज्य स्वतंत्र देशों की गलक्सी है । " लेकिन क्या महान भारत देश स्वतंत्र है ? सितम्बर 1927 की लीग ऑफ नेशन्स की बैठक मे सर ऑस्टिन चमबेरलीन ने ब्रिटिश साम्राज्य के बारे मे बोला कि - " ये स्वतंत्र और समान अधिकार प्राप्त लोगों का एक महान कॉमनवैल्थ है । "
ये statesman क्यों ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं , जब वो जानते है कि तथ्य इसके ठीक उलटे हैं ? भारत जो ब्रिटिश साम्राज्य के 80 % से ज्यादा बड़ा है , स्वतंत्र नहीं है , गुलाम है , और 20% माइनॉरिटी की तुलना मे भारत के लोगों को समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है , जिन पर ज़ोर जबर्दस्ती से शासन किया जा रहा है। अतः हम देख सकते हैं कि ब्रिटिश साम्राज्य का 80 % हिस्सा " गलक्सी ऑफ फ्री नेशन्स , या स्वतंत्र और समान अधिकार वाले कॉमन वैल्थ " के बजाय गुलाम साम्राज्य है।
शायद गैर जिम्मेदार शासन से खतरनाक या दुस्ट प्रवृत्ति वाली कोई भी चीज नहीं होती । " 


‪#‎नोट‬ : भारत का पक्ष अभी तक मेरी जानकारी के अनुसार तीन ही लोगों ने रखा है।
1- गणेश सखरारम देउसकर 1904 - " देश की कथा "
2- J Sunderland - India in Bondage 1929
3- Will Durant - Case For India 1930
सबके सब डॉ अंबेडकर के राजनीतिक कारीयर के शुरवाती दिनों या उसके पहले की हैं । अफसोस , एक भी पुस्तक उनकी निगाहों न से न गुजरीं ?
गावँ में पहले एक प्रथा थी । अगर निमन्त्रण मिल जाय तो कुछ पण्डित जी लोग एक या दो दिन भोजन नही करते थे , अपनी भूखे रहने की क्षमता के अनुसार ।केवल नमक चाट कर पानी पीकर काम चलाते थे।
ये परंपरा ऋषियों ने शुरू की होगी , जिसका सामजिक और वैज्ञानिक दोनों पक्ष है ।
आज दुनिया की सबसे भयानक समस्या ‪#‎मोटापा‬ Obesity है । जिसके कारण diabetese ब्लड प्रेशर गठिया (OA ) जैसी बीमारियों का भरमार होना है ; जिनके अपने अनेक अलग complications होते हैं ।
सामजिक पहलू ये है कि भूंखे रहने के उपरांत जब आप किसी के यहाँ भोजन करने जाते है तो सुखी रोटी भी जन्नत का सुख प्रदान करती है , और आप आतिथेय के भोजन में खोंट निकालकर उसका अनादर करने से बच जाते है ।
दूसरी बात जब आप कैलोरी एडवांस में खर्च कर देते हैं तो चर्बी कहाँ से जमा होगी यानि मोटापा से छुटकारा ।
लेकिन जब हम लोगों ने उस प्रथा को अपमानित करना शुरू किया कि कैसा दरिद्दर बाभन है कि न्योता मिलने पर घर पर खाना बन्द कर देता है ?
तो शर्म के मारे उन्होंने भी उस प्रथा को त्याग दिया।
आज Sunil Saxena ने एक भूखे रहने यानि व्रत रखने का एक नया फायदा बताया कि मॉडर्न साइंस कह रहा है कि इसके कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है ।

 http://ac.els-cdn.com/S1934590914002033/1-s2.0-S1934590914002033-main.pdf?_tid=34f18aaa-3c09-11e5-9382-00000aab0f27&acdnat=1438844774_cb62605eaee55c67709eebfd958f3601

जाति को खत्म करना है तो संविधान को जलाइये , मनुस्मृति को नहीं , जिसमे जाति का प्रमाणपत्र बाँटने का विधान बनाया हुआ है


जाति को खत्म करना है तो संविधान को जलाइये , मनुस्मृति को नहीं , जिसमे जाति का प्रमाणपत्र बाँटने का विधान बनाया हुआ है /
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" Unfailing law ऑफ caste : किस आधार पर सरकार " जाति प्रमाणपत्र " बाँट रही है ?
पहली बार शैडयूल्ड कास्ट का नाम तब सुना जब मेडिकल कॉलेज मे दाखिला हुआ / उस समय इतनी समझ नहीं थी कि ये क्या होता है , लेकिन संसाधन के लिहाज से मुझमे और उनमे कोई विशेष फर्क नहीं था / हाँ उनको कुछ वजीफा मिलता था SC होने के नाते मुझे नेशनल स्कॉलर्शिप मिलती थी मेरी हाइ स्कूल मे मेरिट के नाते / तब मेरे समझ के अनुसार या ग्रामीण परिवेश के नाते इतना ही समझ आता था कि SC माने शूद्र /
अभी मेरे एक मित्र जो कि SC हैं, लेकिन शहर मे पार्षद हैं , उनसे कई बार जाति क्या है , वर्ण क्या है , इस पर चर्चा हुई है / मेरी अवधारणा से प्रभावित होकर उन्होने अपने बेटे के इंजीन्यरिंग के प्रवेश परीक्षा मे जाति प्रमाणपत्र नहीं लगाया / बेटे की रैंक जो आई , उसके अनुसार अगर उन्होने जाति प्रमाणपत्र लगाया होता तो उसको अच्छे कॉलेज मे दाखिला अवश्य मिल जाता , लेकिन उनही के संवर्ग के किसी निचले पायदान पर खड़े किसी अन्य भाई का हक़ मारा जाता / उन्होने हार नहीं मानी है , बोले कि एक साल और तैयारी कर लेगा मेरा बेटा , लेकिन अब मुझे सरकारी भीख नहीं लेना / उनके भाव और आत्मसम्मान को मेरा अभिनन्द्न /
जाति क्या है ? क्या इसका भी कोई कानून है ? भारतीय संस्कृत ग्रन्थों मे तो उल्लेख नहीं मिलता / फिर कैसे ये सरकारी प्रमाणपत्र बांटे जा रहे हैं ? जाति के नाम पर लोगों की भावनाओं को भड़का कर लोग सत्ता के गलियारे मे दाखिल हो रहे है, ऊंचे ऊंचे पदों पर बैठे हैं लोग / अभी उ प्र मे सुना है कि ओबीसी कोटे मे कुल 89 सीट मे 54 यादव ही उस पद के काबिल पाये गए ?
आइये देखें जरा कि किस ग्रंथ के ये जाति के नियम कानून बने ?
पहले जात - पांत था।इस्लाम आया मोहब्बत का पैगाम लेकर तो लोग लपक कर ईमान कायम कर लिए।फिर हुई जात - विरादरी।ईसाइयत आई तो 1901 की जनगणना में एक रेसिस्ट गोरे ऑफिसर H H Risley ने नाक की चौड़ाई को आधार बनाकर -" Unfailing Law Of Caste " बनाया। जिसके अनुसार जिस वर्ग के लोगों की नाक जितनी चौड़ी होगी उसकी हैसियत सामाजिक पिरामिड में उतने नीचे होगी।और जिस वर्ग की नाक जितनी सुतवाँ होगी ; वो सामाजिक पिरामिड में उसकी हैसियत उतनी ऊपर।इसी के आधार पर जो लिस्ट बनी ।उस लिस्ट ऊपर चिन्हित किये वर्ग high caste और नीचे चिन्हित वर्ग lower caste हुए।और जब कॉपी पेस्ट विद्वानों ने इसका हिंदी अनुवाद किया तो caste का अनुवाद किया जाति।जबकि जाति का अर्थ अमरकोश के अनुसार -1- सुमन 2- मालती ( ये दो पुष्प के नाम हैं )3- सामान्य जन्म।
अब थोड़ा विस्तार से ::
H H Risley 1901
रेस या नश्ल एक ऐसा शब्द है जिसका समानर्थी शब्द संस्कृत या हिन्दी में उपलब्ध नहीं हैं (हो तो बताएं ), और जब शब्द ही नहीं है तो वो संस्कृति भी भारतीय सभ्यता का अंग नहीं है / जैसे २० वर्श पूर्व के शब्दकोशों में स्कैम शब्द नहीं मिलता , क्योंकी सरकारी बाबू और नेता के चोरी चकारी का स्तरहीन चोरी को घोटला जैसे शब्दो से काम चला लिया जाता था / लेकिन जब १ लाख ७५ हजार जैसे स्तरीय डकैतियां होने लगी ती स्कैम शब्द का इजाद हुवा/ इसी तराह race Science का जन्म भी १८ वीं शताब्दी में सफ़ेद चमडी के युरोपियन की पूर विश्व में कोलोनी बनने और उस शासन को justify करने से शुरू हुवा / जिसका जन्म डार्विन के survival ऑफ फिटेस्ट से होता है और उसका justification Rudyard Kipling's "White Man's Burden" से खत्म होता है / race साइंस के तहत एन्थ्रोपॉलॉजी अंथ्रोपोमेट्री क्रानिओमेट्री जैसे विषय आते हैं , जिनका प्रयोग सफ़ेद चमदी वाले इसाई विद्वानों ने रेसियल सुपेरियोरिटी और इनफेरियोरिटी के लिये किया हैं / विश्व की विभिन्न देशों मे ब्राउन और काले रंग के लोगों के ऊपर अपने अत्याचारों और लूटपाट का justification करने के लिये , इस साइंस ने उनको नैतिक बल दिया / बहुत ज़ोर शोर से इस इस साइंस का प्रयोग दूसरे विश्वयुद्ध तक किया गया / इधर मैकसमुल्लर जैसे विद्वानों ने जब ये अफवाह फैलाई की आर्य बाहर से आये थे और संस्कृत भाषा को इंडो इरानिनन इंडो युरोपियन और इंडो जर्मन सिद्ध कर दिया गया और स्वस्तिक जर्मनी के सिपाहियों की भजाओं पर शुशोभित हो गया । लेकिन मैक्समुल्लेर के झूंठ खामियाजा यहूदिओं को अपने खून से चुकाना पड़ा । और जब दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मन और युरोपियन इसाइयों ने शुद्ध आर्य खून के नाम पर ६० लाख यहूदियों और ४० लाख जिप्सियों को हलाक कर दिया तो उनेस्को ने race साइंस के आधार पर रेसियल सुपेरियोरिटी और इनफेरियोरिटी कलर और अंथ्रोपोमेट्री और क्रानिओमेट्री जैसे साइंस को खारिज कर दिया / दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी और यूरोप की पुस्तकों से आर्य शब्द और उस थ्योरी को सायास मिटाया गया /
अब भारत की कहानी देखिये १९०१ मे H H Risley ने अंथ्रोपोमेट्री और क्रानिओमेट्री के अधार पर मात्र 5000 लोगों पर रिसर्च करके एक " Unfailing law ऑफ caste ' बनाया और उसके आधार पर एक लिस्ट तैयार की / क्या है ये law ? इस law के अनुसार भारत में किसी व्यक्ति या उसके वर्गसमूह की सामाजिक हैसियत उसकी नाक की चौडाई के inversely proportinate होगी / अर्थात् जिसकी नाक पतली वो समाजिक हैसियत में ऊपर और जिसकी चौडी उसकी समाजिक हैसियत नीचे / 1901 की जन गणना में यही unfailing law ऑफ caste के आधार पर जो लिस्ट बनी वो अल्फाबेटिकल क्रम में नहीं है / वो नाक की चौडाई के आधार पर तय किया गए समाजिक हैसियत यानी सोसियल Hierarchy के आधार पर क्रमबद्ध हैं / उसने 1901मे 2378 caste यानी जातियों और 42 races की लिस्ट तैयार की / इस लिस्ट में जो caste ऊपर दर्ज है वो हुई ऊंची जाति और जो नीचे दर्ज हैं वो हुई नीची जाति /एक शब्द और विज्ञान होता है Taxonomy जिसमें कुच्छ खास लक्षण वाले वनस्पतियों और जीवों को , उन लक्षणों के आधार पर एक विशेष वर्ग में रखा जाता है / उसी तरह एक सनकी ईसाई जनगनणना कमिशनर ने १९०१ में नाक की बनावट के आधार पर (सुतवां नाक , चौड़ी नाक) के आधार पर भारत के हिन्दू समाज को 1901 की जनगणना में 2738 castes और 42 races में taxonomy की साइन्स को आधार बनाकर बांटा / 1921 में इसी जनगणना में depressed class (दलित वर्ग ) घुशेड़ा गया , जिसका आधार क्या है ? ये स्पस्ट नहीं था/ और वो आज भी नहीं हैं / वही race science का प्रयोग करके हिन्दू समाज का caste के आधार पर जो taxonomical विभाजन किया गया , वो आज तक जारी है , और अब तो उसी लिस्ट को संविधान मे डालकर उसे संविधान सम्मत भी बना दिया गया है / डॉक्टर आम्बेडकर का annihilation of caste ने अपने इस सिद्धांत और सपने को अपने सामने बलि चढ़ा दी / उनसे बड़ा हाइपोक्राइट कौन होगा ?
अब उनेस्को ने तो इस साइंस के इन parameter पर रचे गए सारे साहित्य और तथ्य खरिज कर दिये / लेकिन भारत मे race science and Taxonomy के आधार पर तैयार की गयी ये लिस्ट अभी भी जारी हैं ,और अब तो संविधान सम्मत भी हो गयी है , इसको कब खारिज किया जायेगा ?

Monday, 3 August 2015

India In Bondage - J Sunderland part -2

भारत के ब्रिटिश शासन के बारे मे अमेरिका के लोग समझते हैं कि ये एक महान और निर्विवाद शासन है / अंग्रेज़ इस बात को गर्व के साथ प्रचारित करने मे कभी पीछे नहीं रहते कि वे भारतीयों के भले के लिए क्या क्या कर रहे हैं / लेकिन अमेरिका मे हमे जो भी बात पता चलती है वो ब्रिटिश स्रोतों से पता चलता है , इसलिए ज़्यादातर अमेरीकन इस बात की आशंका भी नहीं करते कि इस कहानी का कोई दूसरा पक्ष भी हो सकता है / लेकिन भारत के लोग ये दावा करते हैं, जिसमे दम भी है , कि इसका दूसरा पक्ष भी है, जो ब्रिटिश लेखकों के इस झांसे के पीछे के कडवे सच को उजागर करता है /
जिस तरह अमेरिका के दक्षिणी प्रान्तों मे जब chattel – slavery प्रचलित थी , और जब तक उसकी कहानी गुलामों के मालिकों के मुह से सुनने को मिलता था , तब तक ये लोगों को लगता था कि ये गुलामों के लिए हितकर व्यवस्था थी / लेकिन इस प्रथा की पवित्रता तभी तक बरकरार रह पायी ,जब तक उन गुलामों को अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला था , उन गुलामों का पक्ष सामने आते ही इस प्रथा का असली चरित्र उजागर हो गया /
                              (India in Bondage । पेज – 3 )
भारत के लोग जिन समस्यावों से आज जूझ रहे हैं उसको पूरी तरह समझने के लिए हमे भारत और इंग्लैंड के बीच के सम्बन्धों को समझना पड़ेगा / ग्रेट ब्रिटेन के पास colonies और dependencies दोनों है / और बहुत से लोग दोनों को एक ही चीज समझते हैं / लेकिन ऐसा है नहीं / कोलोनियां स्वायत्त- शाशी हो सकती हैं – ऐसी 6 कॉलोनियाँ जो ब्रिटेन के कब्जे मे हैं , वो हैं – कनाडा ऑस्ट्रेलिया न्यू ज़ीलैंड , साउथ अफ्रीका , न्यूफाउंडस्टेट और आयरिश फ्री स्टेट / लेकिन अन्य ब्रिटिश कॉलोनियाँ स्वायत्तशासी नहीं हैं / वो Dependency हैं / पहले भी बताया जा चुका है कि भारत एक Dependency है /
    इंग्लैंड से पूर्णतया परिचित होने और कनाडा मेन कुछ साल निवास करने के कारण  मैं पूर्णतया इस बात पर भरोसा करता हूँ कि विश्व मे कोई भी सरकार ब्रिटेन के उन स्वायत्तशासी कॉलोनियों से ज्यादा स्वतंत्र हैं , जो शासित लोगों के इच्छा के अनुकूल उनके बहुतेरे हितों और जरूरतों को पूरा करती हैं / ये एक सम्पूर्ण रेपुब्लिक कि तरह स्वतंत्र है / संभवतः वो USA के नागरिकों की  तरह स्वतंत्र नहीं हैं , लेकिन ये कहना अतिसियोक्ति नहीं होगा कि वे लगभग उतने ही स्वतंत्र है / उनका अपनी ब्रिटेन से संबंध बलात और शोसन का न होकर एक सदेक्षा का संबंध है , जिसका आधार आदर और प्रेम है / और ब्रिटिश सरकार जो स्वतन्त्रता देती है वो बधाई और सम्मान का सूचक है /
लेकिन जब आप ब्रिटेन की फ्री कॉलोनियों के बजाय उसके Dependencies पर नजर डालें तो पता चलता है कि ब्रिरिश के अन्य राजनीतिक संस्थाओं जैसा प्रकृतिक संबंध उनसे नहीं है / ब्रिटिश जनता अपने झंडे को आजादी का झण्डा कहती है / वे अपने अलिखित संविधान की बात करते हैं जो कि पूरे विश्व मे ब्र्तिश शासित जनता के सम्पूर्ण आजादी की गारंटी प्रदान करता है / मैग्ना करता का मतलब ही होता है अंग्रेज़ लोगों के लिए स्वायत्त शासन / Cromwell ने इंग्लिश संसद कि पवित्र पुस्तक मे लिखा कि –‘ ईश्वर के न्यायपूर्ण शासन सारे अधिकार लोगों कि सहमति से प्रपट किए जाते हैं “ / उस दिन से ये सिद्धान्त ब्रिटेन के घरेलू राजनीति का निर्विवाद केंद्रीय और मूलभूत सिद्धान्त रहा है / कॉलोनियों मे इसको लागू करने मे समय लगा / अमेरिका कि कॉलोनियों ने 1776 मे इस बात पर अपना रुख स्पस्त कर दिया / “ असली सरकार जनता की सहमति प ही आधारित होती है” / “ बिना प्रतिनिधित्व के कोई टैक्स नहीं दिया जाएगा “ / यदि ब्रिटेन अपने स्वतन्त्रता के सिद्धान्त और स्वायत्त शासन पर खरी उतरती तो 1776 मे सारी अमेरीकन कॉलोनियाँ उसके कब्जे मे रहतीं / लेकिन वो उन पर खरी नहीं उतरी और उसने उनको गवाँ दिया / बाद मे कनाडा उसके हांथ से जाते जाते बचा / उसकी अंखे खुली और कनाडा को उसने स्वतंत्र किया और स्वायत्त शासन कि मंजूरी दी/ इसने कनाडा मे होने वाले विद्रोह को रोका और आज उनके संबंध बहुत प्रगाढ़ हैं / कनाडा मे इस प्रयोग के बाद , ब्रिटेन मे तयशुदा सिद्धान्त बन  गया कि चाहे ब्रिटेन की फ्री कॉलोनियाँ हों या डॉमिनियन स्टेट या घरेलू राजनीति , कोई भी शासन तब तक उचित नहीं ठहराया जा सकता जिसका आधार शासितों की सहमति पर न आधारित हो /
  लेकिन हम इन सिद्धांतों का प्रयोग वहाँ किस तरह कर रहे हैं , जहां Dependies की बात आती है ? क्या वहाँ दूसरे सिद्धांतों का पालन किया जाएगा ? क्या वहाँ के लोगों की अनुमति के शासन करना उचित है ? क्या इंग्लैंड और कनाडा के लिए एक सिद्धान्त होगा  और भारत के लिए दूसरा ? यही विश्वास और भरोसा था कि जो न्याय इंग्लैंड और कनाडा के लिए उचित है वही न्याय हर जगह लागू होना चाहिए , इसी ने Froude को ये कहने के लिए बादधी किया कि , “ स्वतंत्र देश गुलाम देशों पर  शासन नहीं कर सकते “/

पेज 5-7 

J Sunderland 1929 ; इंडिया इन Bondage से उद्धृत

अंग्रेजों और वामपंथियों के द्वारा रचित् भारत का इतिहास बहुत पढ़ा होगा आपने / आज एक अमेरीकन द्वारा 86 साल पूर्व लिखी गयी पुस्तक -India In Bondage से एक लेख पढ़ें , जिसके लेखक J Sunderland थे / उन्होने 33 साल रिसर्च करके यह पुस्तक लिखी थी /
वो भारत पहली बार 1895 में आये थे और यह पुंस्तक 1929 में छपी और इसको छपते ही अंग्रेजों में इसे ban कर दिया।
उनका दावा है कि उस समय भारत के बारे मे लिखी गई शायद ही कोई पुस्तक हो जिसको उन्होने इस बूक को लिखने के पहले न पढ़ी हो /
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क्राइस्ट के 20वीं शताब्दी मे , क्या किसी देश को कोई जबर्दस्ती गुलान बना कर रख सकता है ? तो फिर भारत जैसे महान देश को क्यों ?
एक नजर इस पर , कि भारत है क्या ?
क्या ये बर्बर या अर्धबर्बर लोगों का देश है , जैसा कि बहुधा लोग सोचते हैं ? क्या ये महत्वहीन देश है ? क्या कभी इसकी कोई महत्ता थी , या क्या कभी इसने मानवता के हित मे कुछ ऐसा किया था कि कोई इस बारे मे चिंता करे कि ये स्वतंत्र है या गुलाम ? आइये देखते हैं /
भारत दुनिया का सबसे प्राचीन राष्ट्र है , 3000 साल से भी प्राचीन , जिसका आज तक एक continuous इतिहास रहा है /
चाइना के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है / दूसरे शब्दों मे रुस को छोडकर पूरे एउरोप से ज्यादा आबादी वाला देश , जो उत्तर और दक्षिण अम्रीका से भी ज्यादा जनसंख्या वाला देश है /
भारत एक बहुत ही सभ्य देश है --- एक ऐसा देश जिसने यूरोप के किसी भी देश से पहले एक उच्च संस्कृति को विकसित किया था , जो आज भी अक्षुण्य है //
भारत पहला और अकेला राष्ट्र है , जिसने महान सिकंदर को अपनी शक्ति का परिचय दिया था । ये भारत ही था जिसने उसको उसके विश्व विजय अभियान से वंचित किया था , और वापस लौटने को बाध्य किया था /
भारत तब तक दुनिया का सबसे धनी देश था , जब तक कि ग्रेट ब्रिटेन ने उसको गुलाम बनाया और लूटा नहीं था /
भारत ने विश्व के 6 ऐतिहासिक धर्मों मे से 2 धर्मों को जन्म दिया है /
भारत ने विश्व की सभ्यता की उत्पत्ति और विकास मे , अत्यंत महत्वपूर्ण ‪#‎दशमलव‬ का योगदान देकर अत्यंत महती योगदान दिया है , जिसको ‪#‎अरबिक‬ Notation के नाम से भी जाना जाता है , जो आधुनिक गणित और विज्ञान की नींव बनाता है /
भारत ने ने बहुत पूर्व समकाल मे लगभग सभी तरह के विज्ञानों को ईजाद किया था , जिनमे से कुछ को आगे विकसित किया और पूरी दुनिया का नेतृत्व किया / आज भी , उसकी गुलामी को छोड़ दें तो , बड़े बड़े वैज्ञानिक इसके पास हैं /
भारत ने ‪#‎ग्रीस‬ की स्तर के सुंदर आर्किटैक्चर का आविष्कार किया और जो आज भी उसके पास मौजूद है -- इसके गवाह हैं , दिल्ली मे मौजूद पर्ल मस्जिद ( ?? ) , कुतुब मीनार , दीवाने खास , और आगरा का ताज महल /
भारत ने महान साहित्य ,महान कला , महान दार्शनिक सिस्टम , महान धर्मों , और जीवन के हर क्षेत्र मे महान व्यक्तियों को जन्म दिया है --- शासक , statesmen , financiers , विद्वान, कवि, योद्धा , colonizers , समुद्री जहाजों के निर्माता , skilled आर्टिसन , और हर तरह के हस्तशिल्पी , कृषक , कुशल उद्योग कर्ता , और सुदूर देशों से जमीन और समुद्री रास्ते से व्यापार करने वाले नेतृत्व को जन्म दिया है /
2500 वर्षों तक भारत एशिया , अर्थात विश्व की आधी जनसंख्या का आध्यात्मिक और बौद्धिक गुरु रहा है /
2500 वर्षों तक , जब तक अंग्रेज़ मुख्य पर्दे पर अवतरित नहीं हुये और उन्होने उसकी आजादी को छीना नहीं , तब तक भारत विश्व का सबसे प्रसिद्ध स्वायत्त शासी राष्ट्रो मे गिना जाता था /
ये है वो भारत देश । क्या ऐसे देश को गुलाम बनाकर रखना ठीक है ? क्या ऐसे राष्ट्र को आजादी का , स्वायत्त शाशी होने का अधिकार नहीं है , जिसने मानवता के इतिहास मे महान राष्ट्रों मे अपना स्थान बनाया था , उसको उस पुराने गौरव को प्राप्त करने का अधिकार नहीं है ?
J Sunderland 1929 ; इंडिया इन Bondage से उद्धृत / इंडिया इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ अमेरिका के पूर्व अदध्यक्ष /
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